फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट की वजह से युवक को जाना पड़ा था जेल..

# Neeraj Makhija | 21 Dec, 2022

बिलासपुर/- थाना सिविल लाइन में दर्ज मारपीट के मामले में फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हत्या के प्रयास की धारा जोड़ दी गई,इसके कारण मारपीट के मामले में युवक को जेल में रहना पड़ा,उसके जेल से निकलने के बाद स्वजन ने मेडिकल रिपोर्ट के संबंध में डाक्टर से जानकारी ली,इसमें डाक्टर ने मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी बताया,साथ ही इस संबंध में एक आवेदन भी सरकंडा थाने में सौंपा,डाक्टर के आवेदन की जांच के बाद सरकंडा पुलिस ने कूटरचना और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है,इसमें अस्पताल के मैनेजर और उसके भाई को आरोपित बनाया गया है..

 बताते चले आपको सरकंडा थाने में विवेकानंद अस्पताल के न्यूरो सर्जन डा. नरेश कुमार कृष्णानी ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाने की शिकायत की है,डाक्टर ने अपनी शिकायत में बताया कि 21 अक्टूबर 2022 को सिविल लाइन थाने के एसआइ धर्मेंद्र वैष्णव उनका बयान दर्ज करने आए,एसआइ ने डाक्टर को बताया कि माह जनवरी-फरवरी में उत्कर्ष दुबे(35) निवासी अर्चना विहार से मारपीट हुई है,उसे घायल अवस्था में स्काई अस्पताल में भर्ती कराया गया और वही घायल का उपचार डा. राजीव सखुजा ने किया

इस मामले में पुलिस ने घायल की क्योरी रिपोर्ट मांगी,इसमें घायल को गंभीर चोट आना बताया गया,इसी रिपोर्ट के आधार पर मारपीट के आरोपित शक्ति सिंह के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा जोड़ दी गई,डाक्टर ने बताया कि उन्होंने किसी तरह की क्योरी रिपोर्ट सिविल लाइन थाने में नहीं दी है,मई 2022 से स्काई अस्पताल बंद है...

तो वही क्योरी रिपोर्ट किसने तैयार की इस बारे में उन्होंने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही,डाक्टर ने अपने आवेदन में बताया कि घायल उत्कर्ष दुबे का भाई अंकित दुबे स्काई अस्पताल में मैनेजर था,डाक्टर ने बताया कि उनके और डा. राजीव सखुजा के फर्जी हस्ताक्षर से मेडिकल रिपोर्ट बनाई गई है,इसमें रेडियोलाजिस्ट प्रभुदत्त साहू के भी फर्जी हस्ताक्षर हैं,डा. नरेश कुमार कृष्णानी के आवेदन की जांच के बाद पुलिस ने उत्कर्ष दुबे,अंकित दुबे के खिलाफ कूटरचना और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आरोपित अस्पताल मैनेजर अंकित दुबे और उसके भाई उत्कर्ष दुबे की तलाश कर रही है।

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