आए दिन सुर्खियों पर रहने वाले "साधु राम हिरानी,अमित हिरानी संजय मेवा वाला" पिता पुत्र का खेल है निराला,पहले तगड़ा दबाव हैं बनाना फिर राम-राम कहकर हैं गले लगाना..

# Neeraj Makhija | 05 Nov, 2022

बिलासपुर//- जब से प्रशासन ने सूदखोरी पर शिकंजा कसना शुरू किया है मानो शेरों की दहाड़ कम गीदड़ों की दहाड़ ही सुनाई पड़ रही है..

बतादे आपको पहले शिकायत करो फिर भरपूर दबाव बन जाए तो उस मामलें में समझौता कर लो कुछ ऐसा ही चल रहा है आजकल न्यायधानी बिलासपुर में,ज्ञात हो कि पिछले कुछ दिनों पहले मंगला में रहने वाले "साधु राम हिरानी संचालक संजय मेवा वाला" द्वारा "सूदखोर क्लर्क युगल शर्मा" के खिलाफ थाना सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत की गई थी,जिसमे उसने सूदखोर युगल शर्मा के ऊपर पिछले 8 वर्षों से ब्याज लेने और दुकान में गुंडागर्दी मारपीट सहित कई बातों का उल्लेख किया गया था..

पर जैसे जैसे दिन कटता गया प्रार्थी साधु राम हिरानी द्वारा हर बार की तरह अपनी बातों से मुकरते दिखे और शनिवार को थाना पहुँच आपसी बातचीत हो समझौता करने के लिए लिखित में सौपा..

देखा जाए तो इनका पुराना रिकॉर्ड भी कुछ इसी तरह का हैं,जिसमे इनके परिवार वालो ने भी इसी तरह के कारनामें किये हैं,पूर्व में भी इन्ही के परिवार के सदस्य जो कि अन्य दुकान का संचालन करते है उनका भी मामला पैसा का देन लेन का ही था पर उनके द्वारा भी थाना कोतवाली में शिकायत की गई थी दुकान में मारपीट की पर जैसे ही आरोपी पर पुलिस का दबाव बना उसने प्रार्थी पर समझौते का दबाव बनवाकर मामले को अपनी सोहलियत अनुसार मनवा कर समझौता कर लिया...

इस तरह की शिकायत कर्ता पर प्रशासन को कार्यवाही करनी चाहिए क्योंकि पहले तो यह लिखित में ब्याज सूदखोरी की बात करके दबाव बनाते है फिर अपनी शर्तों पर गले मिल लेते है,यह पहली बार नही है अगर इन महोदय का रिकॉर्ड निकाला जाय तो यह आधे समय कचहरी पेशी ही में मिलेंगे पर यह प्रशासन को गुमराह कर अपनी बातें मनवाने का सिलसिला इन महोदय का थमना चाहिए अन्यथा इनका हौसला बुलंदियों पर चढ़ जाएगा फिर यह किसी भी सज्जन व्यपारी के पैसे को भी तब्दील न कर दे सूदखोरी पर यह सोचनीय होगा..

यह बात तो समझ से परे है कि क्या पुलिस थाना में बैठे अधिकारी कर्मचारी इन जैसे लोगो के लिए बने है,कि पहले वे थाना पहुँच किसी की भी शिकायत कर ले फिर उसके बाद समझौता करके मामले को निपटा ले,इसी तरह के मामलों में तो पुलिस को भी ऐसे प्रार्थियों पर उचित से उचित कार्यवाही करनी चाहिए ताकि यह लोग आईंदा पुलिस के पास जाकर उन्हें यू ग़ुमराह न करें..

वही देखा जाए तो बार बार थाने पर आने जाने वाले व्यपारी से होलसेल व्यपारी भी डरने लगते है व कन्नी काटते देखे गए है कही साधुराम हिरानी का यह समझौता का सिलसिला भारी न पड़ जाए यह चर्चा भी जोरो पर है,वही अब तो साधुराम हिरानी की लीला हिरानी परिवार ही जाने,प्रशासन ने अपनी कार्यवाही कर मामला निपटाया..

वही हम यदि बात करें प्रार्थी पक्ष की तो इनकी इस प्रकार की आदत ही कह सकते हैं की पहले शिकायत करो फिर उनपर दबाव बना लो और अंत मे उस मामले में समझौता कर लो जिससे इनका दबदबा बने रहे और जिन्हें इससे पैसे लेने है वह इनपर दबा न बना सके और यह अपने हिसांब से कार्य कर सके...

अब हम बात करें साधु राम हिरानी के पुत्र अमित हिरानी की तो यह जनाब भी कुछ कम नही हैं,पूर्व में इनके खिलाफ भी थाना सिविल लाइन में शिकायत हो चुकी हैं,जिसमे भी इनके पुत्र द्वारा प्रार्थी पर दबाव बनवाकर अगले ही दिन आपसी सहमति से समझौता होना लिखित में दिलवा दिया, वही देखा जाए तो इनके खिलाफ़ होने वाली तकरीबन हर शिकायते पैसों के लेंन-देंन से ही जुड़ी होती हैं,जिसपर प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए अन्यथा यू ही इनका सिलसिला जारी रहेगा और यह शिकायत करते रहेंगे और अपने शर्तो के अनुसार ही समझौता करते रहेंगे...

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