38 साल पुरानें रिकार्ड्स बदल फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए बेच दी करोड़ो की ज़मीन...

# Neeraj Makhija | 10 Apr, 2022

बिलासपुर/- यू तो बिलासपुर को न्यायधानी के रूप में जाना जाता हैं,पर देखा जाए तो राजस्व के मामलें में यहां न्याय मिल पाना असंभव सा ही लगता हैं,हमेशा से जमीन विवाद और भू-माफियाओं के कारनामों के लिए सुर्खियों में रहने वाला बिलासपुर वर्तमान में भी सुर्खिया बटोर रहा हैं,मामलां सरकंडा थानां क्षेत्र के मोपका/चिल्हाटी का हैं..

बताते चले आपको सरकंडा क्षेत्र के मोपका चिल्हाटी की भूमि के दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर 38 साल पुराना रिकार्ड्स बदल दिए गए हैं,इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों की जमीनें बेच दी गई,शिकायत पर पुलिस ने जांच की तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों पर दो एफआईआर दर्ज कर मामले की आगे छानबीन कर रही है,जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है..

सरकंडा थाना प्रभारी परिवेश तिवारी ने बताया कि मोपका/चिल्हाटी की जमीन को लेकर फर्जीवाड़ा की शिकायतें मिल रही थी,जिसके बाद टीम बनाकर जांच की गई पाया गया कि चिल्हाटी के खसरा नंबर 1859/1 रकबा 1.03 एकड़ जमीन के दस्तावेजों और 845/1 रकबा 1.00 एकड़ भूमि के दस्तावेजों में कांट-छाट होना पाया गया..

जांच में पाया गया कि इंडेक्स रजिस्टर में अतिरिक्त प्रति जोड़कर विक्रय अभिलेख की मूल प्रति व खसरा पंचसाला 1983-1984 के मूल अभिलेख में काट-छाट करके दस्तावेज तैयार किए गए थे,इन्हीं दस्तावेजों के जरिए जमीन बेच दी गई पुलिस ने धारा 420,467,468,471 व 34 के तहत दो मामले दर्ज कर आगे की जांच कर रही है..

देखा जाएं तो पुलिस अपराधियों को पकड़ने में या बचाने में ताकत लगा रही हैं यह समझ से परे है क्योंकि जिस समय राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई,उस समय पटवारी से लेकर तहसीलदार सहित कई विवादित राजस्व अधिकारी बिलासपुर में पदस्थ रहे हैं,उनकी भूमिका हमेशा से और कई मामलों में संदिग्ध रही है इसके बावजूद राजस्व विभाग और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है इतना ही नहीं अज्ञात पर केस दर्ज कर अन्य लोगों को इसमें लपेटने की तैयारी चल रही है,जबकि यह बात सभी जानते हैं कि सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ सिर्फ उसी वार्ड के अधिकारी कर्मचारी ही कर सकते हैं...

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