धोखाधड़ी मामले में आरोपी फिर भी कॉलोनाइजर लाइसेंस जारी, बिलासपुर में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा

# Neeraj Makhija | 10 Oct, 2025

डेस्क//- निगम से कालोनाइजर लाईसेंस जारी कर दिया गया है। कालोनाइजर लाइसेंस जारी करने के पहले निगम के द्वारा पुलिस बेरिफिकेशन मंगाया जाता है, जिसमें कहा गया है कि उस डेट में उक्त आवेदनकर्ता के खिलाफ कोई मामला दर्ज लिखित जानकारी दी गई थी

जिसके बाद कॉलोनाइजर लाइसेंस जारी किया है, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार लाइसेंस प्राप्त करने के पहले से तोरवा थाने में कालोनाइजर के खिलाफ मामला पंजीबद्ध है। कॉलोनाइजर लाइसेंस लेने के लिए फर्म अमलजीत डेवलपर्स भागीदार राजेंद्र मोटवानी पिता डुलाराम मोटवानी के द्वारा निगम में आवेदन दिया गया था, जिसे कालोनाइजर लाइसेंस जारी कर दिया गया है।

जबकि उक्त व्यक्ति के खिलाफ तोरवा थाने में धारा 34, 420, 467, 468, 471 के तहत 8 अप्रैल 2025 को एफआईआर दर्ज किया गया है, वहीं 25 जुलाई 2025 को राजेन्द्र मोटवानी के नाम से निगम से कालोनाइजर लाइसेंस जारी हुआ है। निगम अधिकारियों के अनुसार कालोनाइजर लाइसेंस लेने के लिए प्रक्रिया के तहत आवेदन लिया जाता है, उसके बाद पुलिस, रेवेन्यू आदि से एनओसी आने के बाद सिक्योरिटी राशि जमा करने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है।

लाइसेंस इसलिए जरूरी कॉलोनी विकसित करने के लिए कॉलोनाइजर लाइसेंस जरूरी है। इसके लिए निगम के पास 10 लाख रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करवाना पड़ता है, ताकि आगे किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी हो तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। लाइसेंस के लिए सबसे पहले नगर निगम में आवेदन देना पड़ता है। इसके बाद नगर निगम द्वारा पुलिस वेरीफिकेशन करवाया जाता है। पुलिस से एनओसी मिलने के बाद, रेवेन्यू एनओसी लिया जाता है कि कहीं कोई शुल्क आदि बकाया तो नहीं है।

सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा होने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। ऐसे भी मामले आए हैं जब लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कॉलोनाइजर के खिलाफ मामला दर्ज होने की शिकायत मिलती है तो निगम द्वारा प्रावधान के अनुसार जांच की जाती है। जांच में सही पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त कर दिया जाता है। ऐसे मामले आने पर उनके द्वारा बनाए गए कॉलोनी को अवैध घोषित कर कार्रवाई की जाती है। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं आया है।

पुलिस से मिली एनओसी सबसे अहम बात है कि जिस व्यक्ति के द्वारा कालोनाईजर लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, उसके खिलाफ लाइसेंस जारी होने के तीन माह पहले से तोरवा थाने में धोखाधड़ी एवं अन्य मामले दर्ज हैं। इसके बावजुद पुलिस वेरिफिकेशन में इस तरह की लापरवाही कैसे की गई। अधिकारियों के द्वारा यह भी कहा जा रहा कि जब एनओसी जारी किया गया उस समय तक लाइसेंस प्राप्त करने वाले के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था।

झूठा शपथ पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र देने को लेकर पीयूष गंगवानी के द्वारा निगम आयुक्त, भवन शाखा प्रभारी एवं एसएसपी से लिखित शिकायत कर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

अपराध दर्ज होने का रिकॉर्ड नहीं मिला था

जब पुलिस वेरीफिकेशन के लिए मामला आया था तब सीसीटीएनएस में अपराध दर्ज होने का रिकॉर्ड नहीं मिला था। अब थानों से जानकारी मंगवाई जा रही है।इसमें अगर एफआईआर दर्ज होना मिलता है तो कॉलोनाइजर लाइसेंस निरस्त करने के लिए लिखा जाएगा

 रजनेश सिंह, एसएसपी, बिलासपुर

शिकायत मिली है, जांच के बाद कार्रवाई करेंगे

राजेंद्र मोटवानी द्वारा फर्जी शपथ देने की शिकायत हमें भी मिली है। इसमें लाइसेस जारी करने से पहले पुलिस एनओसी मंगाया गया था। पुलिस ने लिखित में दिया था कि उस डेट से पहले उनके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है। वहां से जानकारी आने पर कार्रवाई करेंगे।

अमित कुमार, आयुक्त, नगर निगम बिलासपुर

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