बिलासपुर में भू-माफियाओं का बोल-बाला..

# Neeraj Makhija | 19 Jun, 2025

डेस्क/-  मैग्नेटो मॉल के सामने स्थित हाई प्रोफाइल जमीन को कम दाम पर लेकर दूसरे पार्टी को बेच दिया गया..

पटवारी ने लिख कर दिया रास्ते की जमीन पर है कब्जा* ज्ञात हो की एक भू-माफिया ने राजस्व अफसरों, राजनैतिक पहचान व साठ-गांठ कर के नगर निगम की बेशकीमति 1235 वर्गफीट जमीन पर एक महिला उर्मिला उर्फ सुधा चौहान से उसकी जमीन बता कर 21 लाख रुपए में सौदा किया और एक युवक के नाम पर सुधा से पावर ऑफ अटॉर्नी लिखवा लिया उक्त युवक ने जमीन अश्विनी यादव के नाम पर बिना सीमांकन रजिस्ट्री करवा दी दस्तावेज के अनुसार जमीन रजिस्ट्री होने के बाद अश्वनी ने सुधा चौहान के नाम से सीमांकन के लिए तहसील न्यायालय में आवेदन दिया तहसीलदार के आदेश पर आरआई और पटवारी ने रिपोर्ट दी है

जिसमें पटवारी द्वारा बनाए गए नजरी नक्शा में स्पष्ट उल्लेख है कि सुधा चौहान ने रास्ते की जमीन पर कब्जा किया है। पटवारी से नजरी नक्शा जारी होने के बाद भू माफिया ने उनमें उल्लेख रास्ते की जमीन लिखे हुए शब्द को ही गायब कर दिया और दूसरा नजरी नक्शा तहसील न्यायालय में पेश कर दिया जिसके आधार पर उसके नाम पर सुधा चौहान द्वारा बेची गई जमीन चढ़ा दी गई

वही पटवारी और री की रिपोर्ट में सिर्फ यह बताया गया है कि सुधा की खेसरा नंबर 723/ 208 शामिल खेसरा 723/209 रकबा 0.12 एकड़ खेसरा नंबर 723/3 और खेसरा नंबर 731/3 के अंश भाग में स्थित है यह मामला पहले दिन से ही विवादित रहा लेकिन भूमाफिया पपू यादव अश्वनी यादव ने गुडागदी दबंगई के आधार पर पहले जमीन को कौड़ी के भाव में खरीद कर दूसरे पक्ष को करोड़ों में बेच दी।

वही उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, मैग्नेटो मॉल के सामने भूना बिलासपुर पटवारी हल्का नंबर 36 में खेसरा नंबर 723 है। इस जमीन के कई टुकडे है। ये जमीन शक से ही विवादित रहीं है। इसके बावजूद प्रशासनिक राजनैतिक दवाब के चलते जमीन पर अवैध कब्जा करने में शहर के भू-माफिया अश्वनी यादव उर्फ पप्पू यादव ने जमीन की खरीद बिक्री कर के न्यायिक नियमों की धज्जियां उड़ा दी। क्योंकि इस जमीन से लगी हुई नगर-निगम की जमीन हैं जिसके दो खेसरा नम्बर है रकबा 1200 और दूसरा खेसरा नंबर 1235 वर्गफीट जमीन है।

पुराने नक्शों में इस जमीन का साफ तौर पर उल्लेख है और राजस्व रिकॉर्ड में ये जमीन रास्ता मद में दर्ज है। वही 12 डिसमिल जमीन को राजस्व अफ़सरों और गुंडे से साठ गांठ कर बिक्री कर दिया गया जिसका खेसरा नंबर 723 , 208 है दूसरे पक्ष को इसमें से बेचे गए टुकड़े का नामांतरण आवेदन बिलासपुर तहसील कार्यालय में लंबित है।

इसी को आधार बनाते हुए नगर निगम ने 23 मार्च 2025 को पप्पू यादव उर्फ अश्विनी यादव को नोटिस भेजते हुए 3 दिन के अंदर जवाब मांगा गया था जवाब न देने की स्थिति में नगर निगम कार्यवाही के संकेत भी दिए थे। जवाब में मात्र खानापूर्ति नजर आ रही है राजनीतिक एवं प्रशासनिक बल पर पप्पू यादव उर्फ अश्विनी यादव इतना मजबूत है कि जमीन पर अपना कब्जा कर लिया लेकिन नगर निगम प्रशासन अवैध कब्जे को हटा नहीं सके इसमें बड़े पैसे का लेनदेन किया गया है। जिसके चलते प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है राजनीतिक लोगों की मिली जुली है।

वहीं दूसरी तरफ एक जमीन पर नगर निगम पर जो अवैध कब्जा है वहां 24 घंटे के अंदर अतिक्रमण को हटाते हुए अपने जमीन को कब्जे में ले लिया गया लेकिन दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा दोहरी नीति पर काम की जा रही है। प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे चूंकि राजनीतिक दबाव है जिसकी भ्रष्टाचार की भी बात सामने आ रही है..

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