दंड संहिता से आगे बढ़कर न्याय संहिता की ओर नया कानून..

# Neeraj Makhija | 02 Mar, 2024

बिलासपुर/- आने वाले समय में कानूनों में बदलाव होने जा रहा है। यह दंड संहिता से न्याय संहिता की ओर एक कदम है। कार्यशाला में अपराधी को दण्ड एवं पीड़ित को न्याय के विशेष प्रावधानों का उल्लेख है। नए कानून के व्यापक प्रचार प्रसार की जरूरत है। ये बातें शुक्रवार को लखीराम अग्रवाल आडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला के दौरान अतिथियों ने कही। पुलिस की ओर से शुक्रवार को लखीराम आडिटोरियम में नवीन कानून संशोधन पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए आइजी डा. संजीव शुक्ला ने कहा 160 वर्षों से चले आ रहे औपनिवेशिक कानूनों की श्रृंखला में बदलाव किया जा रहा है..

यह बदलाव भारतीय समाज की आवश्यकता और भावनाओं के अनुरूप है। कानून में संशोधन मुख्य रूप से अपराधी को दंड और पीड़ित को न्याय दिलाने किया जा रहा है। कानून में संशोधन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और न्याय को प्राथमिकता दी गई है। आतंक और संगठित अपराध के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। वैज्ञानिक और इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के महत्व को नए कानून में स्पष्ट किया गया है। नए प्रावधान को उपयोग में लाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम को उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष उमांकात सिंह चंदेल और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर बाजपेयी ने भी संबोधित किया

उन्होंने इस तरह के प्रशिक्षण एवं कार्यशाला के आयोजन को आवश्यक बताया। इसी प्रकार उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष उमांकात सिंह के द्वारा भी इन प्रावधानों के परिपालन के लिये सभी संबंधित विभागों में समन्वय की महत्ता की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बाजपेयी के द्वारा भी इस तरह के प्रशिक्षण एवं कार्यशाला को कई अवसरों पर आयोजित किया जाना आवश्यक होना बताया गया, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग नये कानून के प्रति जागरूक हों। कार्यक्रम के दौरान आइएमए के डा. विनोद तिवारी, डा. अखिलेश देवरस, कौशलेन्द्र राव विधि महाविद्यालय के प्राचार्य सतीश तिवारी, एएसपी राजेंन्द्र जायसवाल, अर्चना झा, वरिष्ठ पत्रकार हर्ष पाण्डेय, प्रवीण शुक्ला, मोहम्मद इरशाद अली समेत अन्य मौजूद रहे। नवीन कानून की उपयोगिता से अवगत कराना सबकी जिम्मेदारी: एसपी रजनेश सिंह नया कानून में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के विरुद्ध अपराध के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। कानून के लागू होने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी विस्तार किया जाएगा..

भविष्य में होने वाले बदलाव की जानकारी पर चर्चा और परिचर्चा कर लोगों के बीच इसकी उपयोगिता को बताना होगा। यह जवाबदारी सबकी है। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा अलग-अलग कार्यक्रम के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा। कई कानून अब अनुपयोगी: सुशांत पुलिस की ओर से आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि कई कानून की उपयोगिता भारतीय समाज में नहीं है,वर्तमान तकनीकी परिस्थितियों को देखते हुए त्वरित न्याय के लिए नए प्रावधान और कानून की जरूरत है। कानून के संशोधन में इसका विशेष ध्यान रखा गया है। कानून में संशोधन से पीड़ित को जल्दी न्याय मिलेगा। साथ ही अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे समाज में सुरक्षा का वातावरण बनेगा। विधायक सुशांत शुक्ला ने अपने सम्बोधन में कई कानूनों का उदाहरण दिया, जिनकी भारतीय समृद्ध समाज में कोई उपयोगिता वर्तमान में नहीं है तथा वर्तमान तकनीकी परिस्थितियों को देखते हुए त्वरित न्याय के लिए प्रावधान नये कानून में किए गए हैं।

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